जब नज़रें आसमां की और टिक जाये। दिल-दिमाग नाउम्मीदी का दामन थाम ले। ग़मगीन घटाएँ घनी होकर जब तब बरस जाये। आसपास की जहरीली हवा जीने न दे तो 284 आसनों में से एक भ्रमासन ही आपके लिए रामवाण है।इस आसन में आप फीलगुड महसूस करेंगें। इंडिया शाइनिंग का अक्स आपके चेहरे को पतंजलि प्रोडक्ट की तरह क्रांति और तेजस्वी बना देगा।आपके खराब दिन लद जायेंगे और अच्छे दिनों की शुरुआत हो जाएगी। इस आसन की खोज राजपथ पर योग दिवस के दिन तब हुई जब रेलवे की तमाम परेशानी से निज़ात पाने को प्रभु जी सारे योगी को छोड़ एक अलग आसन में चले गए। अब यह आसन पाठ्यक्रम में शामिल होगा। इस आसन का उपयोग बिहार चुनाव में भी होगा। राजपथ से योग करके लौटीं काकी कहिन कि बेटा! हालात ने वक़्त से पहले कितनों को बूढ़ा बना दिया। वरना सभी कहते कि ये बाल हमने धूप में नहीं पकाए हैं।इसलिए भ्रमासन कीजिये और करायिए। इससे आपका भला होगा और दूसरे को भाला होगा।
Wednesday, July 1, 2015
भ्रमासन
जब नज़रें आसमां की और टिक जाये। दिल-दिमाग नाउम्मीदी का दामन थाम ले। ग़मगीन घटाएँ घनी होकर जब तब बरस जाये। आसपास की जहरीली हवा जीने न दे तो 284 आसनों में से एक भ्रमासन ही आपके लिए रामवाण है।इस आसन में आप फीलगुड महसूस करेंगें। इंडिया शाइनिंग का अक्स आपके चेहरे को पतंजलि प्रोडक्ट की तरह क्रांति और तेजस्वी बना देगा।आपके खराब दिन लद जायेंगे और अच्छे दिनों की शुरुआत हो जाएगी। इस आसन की खोज राजपथ पर योग दिवस के दिन तब हुई जब रेलवे की तमाम परेशानी से निज़ात पाने को प्रभु जी सारे योगी को छोड़ एक अलग आसन में चले गए। अब यह आसन पाठ्यक्रम में शामिल होगा। इस आसन का उपयोग बिहार चुनाव में भी होगा। राजपथ से योग करके लौटीं काकी कहिन कि बेटा! हालात ने वक़्त से पहले कितनों को बूढ़ा बना दिया। वरना सभी कहते कि ये बाल हमने धूप में नहीं पकाए हैं।इसलिए भ्रमासन कीजिये और करायिए। इससे आपका भला होगा और दूसरे को भाला होगा।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
ऐ अब्रे करम जरा थम के बरस इतना न बरस कि वो आ न सके जब आ जाये तो जमके बरस और इतना बरस कि वो जा न सके। हमारी काकी की मोदी से मुहब्बत ओह....
-
ए दोस्त।दोस्ती का वास्ता।मुख न मोड़ना।आज उस गुरु को भी नमन करना, जिसने तेरा ताम्रपत्र यानी प्रेमपत्र पकड़ा था। प्रेम और पत्र दोनों चबा गए थे...
No comments:
Post a Comment