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ए दोस्त।दोस्ती का वास्ता।मुख न मोड़ना।आज उस गुरु को भी नमन करना, जिसने तेरा ताम्रपत्र यानी प्रेमपत्र पकड़ा था। प्रेम और पत्र दोनों चबा गए थे...
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सर सज्दे में झुकाए , कब तक रहोगे यार। दिल को सकून दिल से है , क्यों बहाये अशुअन की धार। तन-मन को धोने से दामन धूल ना जायेगा। चल चिलमन...
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खेमागाह में आप सबका ख़ैरमकदम है। आइये अपना तम्बू तानिए। डेरा डालिए।आगाज़-अंजाम के अंदेशे को धुएं में उड़ाते हुए जिसके अंधभक्त हैं, उसके धंधे...
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